Wednesday, March 14, 2007

फ़िल्म फ़ेयर अवार्ड और बच्चन परिवार – All in the Family

वर्ष २००७ के फ़िल्म फ़ेयर अवार्ड देखे , हर तरफ़ बच्चन और होने वाली बच्चन छाए हुये थे … अभिषेक बच्चन को मिला Best supporting Actor और वो भी उनके हाथ से जिनके वो और उनकी वो जीवन भर सहायक (Support) रहने वाले हैं, उसके पहले Life time achievement award पति के हाथों पत्नि को . याने जया जी को अमिताभ जी से . फिर कोइ एक और अवार्ड मिला ऐश्वर्या को ससुर जी के हाथों. तो इस तरह All in the family .
एक जमाने में कपूर परिवार छाया हुआ था पुरी तरह से बोलीवुड पर. श्री पृथ्वीराज कपूर से जो शुरुआत हुइ तो उनकी विरासत को संभाला श्री राज कपुर जी ने और उनके भाईयो क्रमशः शम्मी और शशि कपुर जी ने…और उनके बाद राज कपुर जी के बेटों में ऋषि कपुर से अधिक कोई सफ़ल नही हो पाया . रणधिर कपुर अछ्छे अभिनेता थे लेकिन फ़िल्मो मे आपकी किस्मत एक बहुत बडी भूमिका निभाती है आपके सफ़ल होने में और बहुत सारी मेहनत तो है ही… रणधिर कपुर कहां चूक गये पता नही .
शशि कपुर के बच्चों ने भी असफ़ल कोशीश कि लेकिन वो उतना रंग नही जमा पाये . उनके बाद करिश्मा कपूर को क्या पापड नही बेलने पडे सफ़ल होने के लिये ये सभी जानते हैं खैर वो सफ़ल तो हुईं और बहुत सफ़ल हुईं .
उनके बाद आईं करीना और वो भी सफ़ल अभिनेत्रीयों में गीनी जाती हैं हालांकी अपने काम से ज्यादा उनका नाम अलग- अलग विवादों से ज्यादा जुडा रहता है .
तो ह्म पुनः आते हैं हमारे पहले विषय बच्चन परिवार पर, कपुर परिवार का जिक्र करना यहां इसलिये जरुरी था कि आखिर वो बोलीवुड का भूतपुर्व प्रथम परिवार था . आज बच्चन परिवार है .
अमिताभ बच्चन, जया बच्चन , अभिषेक बच्चन तो थे ही और अब एक नया नाम – ऐश्वर्या राय (बच्चन भविष्य में यदि सब ठिक रहा तो, हम तो भगवान से यही मांगते हैं कि अभिषेक हमेशा खुश रहें ).
जया जी की speech दिल को छु गयी - इतनी समर्पित पत्नि और अभिनेत्री … मैं आपको संक्षेप मे बताती हुं – “सबसे पहले तो मैं भगवान का धन्यवाद करना चहुंगी जिसने मुझे यहां तक पहुंचाया और फिर सत्यजीत रे का धन्यवाद करना चाहुंगी जो आज यदि दुनिया में होते तो मुझे यहा देख कर बहुत प्रसन्न होते और ऋषिकेश मुखर्जी जो पिता समान थे .
और उस इन्सान का धन्यवाद करना चाहुंगी जिसका नाम है - अमिताभ बच्चन.. क्योंकी उन्होने मुझे एक घर दिया दो प्यारे बच्चे – श्वेता और अभिषेक . जो कुछ भी थोडी बहुत मैं आज कुछ हुं वो उन्ही के कारण . मेरे दामाद निखिल बहुत ही अछ्छे इन्सान हैं. मुझे इससे पहले भी यह अवार्ड देने के लिये बोला गया था , परंतु वो सही समय नही था . अब जब की मैं पुनः एक बार mother in law बनने वाली हुं यह सही समय है क्युंकी मेरा परिवार पुरा हो रहा है “.

आप सोचेंगे कि मुझे क्या हो गया कि मै जया जी की पुरी speech का अनुवाद कर रही हुं. कुछ बातें इसमें ऐसी हैं जिनसे महसुस होता है कि किस तरह इस परिवार ने अपनापन आज भी बचा कर रखा है, जहां फ़िल्मी परिवारों में तलाक आम बात है… अपनापन और पारिवारीक मुल्य संजो कर रखना अपने आप में एक मिसाल है .

2 comments:

अनूप शुक्ला said...

अपनापन और पारिवारीक मुल्य संजो कर रखना अपने आप में एक मिसाल है . सत्य वचन!

Nishikant Tiwari said...

दिल की कलम से
नाम आसमान पर लिख देंगे कसम से
गिराएंगे मिलकर बिजलियाँ
लिख लेख कविता कहानियाँ
हिन्दी छा जाए ऐसे
दुनियावाले दबालें दाँतो तले उगलियाँ ।
NishikantWorld