Tuesday, March 6, 2007

रेव पार्टी – ड्र्ग्स के सौदागर और हमारी नई पिढी


होली के पवित्र दिन पर पुने में जो हुआ वो सही मायनों में शर्मदायक है । करीब २५१ नवयुवक और नवयुवतियां जिनमें कुछ छात्र थे तो कुछ सुचना प्रणाली की कंपंनीयों मे काम करने वाले और कुछ विदेशी नागरीक ! ३० के लगभग लडकीयां थीं और शेष लडके…
सभी नशे में धुत्त थे, चरस , गांजा, नशे के इन्जेकशन और भी ना जाने क्या क्या जो मैनें आज तक सुने भी नही थे, का सेवन करते पाये गये । सिर शर्म से झुक जाता है…एक तरफ़ तो हम भारत को महाशक्ति बनाने की बात करते हैं और दूसरी तरफ़ हमारी नई पिढी जो हमारे भविष्य की आशा है इस कदर भटकी हुई है कि मनोरंजन के लिये हि क्यु ना हो, वो ड्र्ग्स जैसे नशे का सहारा ले रहे हैं ।

इस सब के लिये कौन जिम्मेदार है, ये नौजवान, आजका माहौल , सुचना प्रणाली के क्षेत्र में मिलने वाला ढेर सारा पैसा जो इन बच्चों को बहुत कम उम्र में ही मिल जाता है, और ये नही जानते कि उसका सदुपयोग कैसे किया जाये, या इन बच्चों के माता – पिता ? जो अपनी व्यसत जीवन शैली में इस तरह से फ़ंस चुके हैं की बच्चे क्या कर रहे है, कहां जा रहे है और रात को घर में क्यु नही है (अगर पार्टी मे गये हैं तो किस तरह की पार्ट्री है वगैरह )

सबसे ज्यादा गल्ती तो मुझे मां-बाप की ही दिखाइ देती है, अरे इतना भी क्या पैसे के पीछे भागना की घर में आग लग जाये ?
ऐसा नही है कि ये सब पुने में पहली बार हो रहा हो, बहुत कुछ होता है यहां , बस इस बार खुल कर सामने आया है वो भी किसी के जानकारी देने पर पुलिस की निंद खुली , नही तो महिना खतम होने होने पर हर सिग्नल पर रकम वसूलने और नेताओं के लल्लो चप्पो से फ़ुरसत मिले तो काम किया जाये ।

पार्टी में शामिल सारे नौजवान २० से २५ वर्ष की आयु के थे , और इस तरह की कुछ और पार्टीयां भी होती हैं जिन्हे “डोप” पार्टी बुलाया जाता है.. और उसमे भी यही बकवास होती है । मुझे ऐसे मालुम है की कभी कभी अखबारों में गाहे बगाहे पढने मिल जाता है
ढेर सारा पैसा कमाना है, बहुत आगे जाना है.. कुछ कर दिखाना है… ये सब सुनना और उस पर अमल करना कभी भी गलत नही है, अगर हम अपनी मर्यादाओं में रहें । हमारी सभ्यता हमें नही सिखाती की बेटा नशा करो अगर कुछ मनोरंजन के लिये चाहिये तो ! ऐसे तो शिव जी ने भी भांग पी थी और होली पर उनके चलते ही लोग-बाग भांग और शराब और बियर पीते हैं (शिव जी ने भी नही सोचा होगा के भाई मेरा नाम ले कर ये मनुष्य सारे गलत काम करेगा), तो ये भी देखिये की इन्हीं शिवजी ने सारी सृष्टि की रक्षा करने विष भी पिया था… है हिम्मत की किसी दुखियारे को हंसा सको? किसी के सारे दुख अपने में समेट सको?? नही है… इतनी हिम्मत है की घर के बाहर पढने या नौकरी करने जाओ और अपने जन्मदाताओं का नाम खराब करो …

3 comments:

अनूप शुक्ला said...

ये नशे का कारोबार बड़ी खतरनाक चीज है। लड़के बिना सोचे-समझे इसके जाल में फंस जाते हैं।

राजीव said...

आपका सोचना उचित ही है। यह नव-धनाड्यता और कुछ कुछ अभिवावकों की उदासीनता दोनों ही कारण हैं इसके। साथ ही साथ वैभव प्राप्ति की अन्धी दौड़ भी।


शायद यह सब अवांछनीय अवश्य है, पर इस प्रकार की विडंबनाएं तो अन्धानुकरण के कारण अपरिहार्य ही हों।

Suresh Chowhan said...

ये सच है कि बच्चो को बिगाड़ने और सुधारने में माता पिता का सहयोग सबसे ज्यादा होता है है। हो सकता हैं इनमे से कुछ ऐसे हो जिनको केवल माँ बाप ने ही बिगाड़ा हो।