Tuesday, October 9, 2007

सभी पाठ्कों से क्ष्मायाचना

आज इतने दिनों के बाद लिखने का समय मिला, माफ़ी चाहती हुं सभी पाठकों से ।
जीवन हमें कुछ ऐसे ऐसे दिन दिखाता है कि आप मुसिबतों के जाल में फ़ंस के रह जाते हैं..मेरे साथ भी कुछ ऐसा ही चल रहा है मेरे व्यावसायिक जीवन में गडबड चल रही है, भगवान ने चाहा तो जल्दी ही सब ठीक हो जायेगा । आप सभी कि दुआऐं तो हैं ही मेरे साथ, तथास्तु !!

3 comments:

संजय बेंगाणी said...

हमारी प्रार्थनाएं बिलकुल आपके साथ है. सारी गड़बड़-सड़बड़ जल्द ही सही हो जाएगी.

व्यवसायिक सफलताओं के लिए शुभकामनाएं. जल्द चिट्ठाकारी में लौटें.

हिन्दी टुडे said...

"रूक जाना नहीं तू कहीं हार के…………"और जिंदगी हर कदम एक नयी जंग है………" कभी भी यह मत सोचना की "चमकते चांद को टूटा हुआ तारा बना डाला…" क्योंकि जिन्दगी इम्तहान लेती है। और जो हिम्मत से काम लेता है। वह जरूर सफल होता है। ये मेरा नहीं सभी उन लोगों का विशवास है,जो परिवार से लेकर व्यवसाय की बडी से बडी जंग हिम्मत के दम पर जीत गये। आपके सफल भविष्य की कामना के साथ …………

उन्मुक्त said...

आशा है कि सब ठीक हो गया होगा - लिखना शुरू कीजिये।